नई दिल्ली। ऋतु परिवर्तन का समय प्रकृति के साथ-साथ हमारे शरीर के जैविक संतुलन के लिए भी अत्यंत संवेदनशील होता है। जब मौसम गर्मी से सर्दी या बरसात से ठंड की ओर करवट लेता है, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) स्वाभाविक रूप से कमजोर हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार, इस दौरान त्रिदोष—वात, पित्त और कफ में असंतुलन पैदा होता है, जिसके कारण सर्दी, खांसी, फ्लू, जोड़ों का दर्द और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो जाती हैं। लेकिन अपनी दैनिक जीवनशैली में आयुर्वेद के कुछ सरल और कालजयी नियमों को अपनाकर हम बिना दवाओं के पूरे साल स्वस्थ और ऊर्जावान रह सकते हैं।
📌 इम्यूनिटी बढ़ाने वाले 5 अचूक आयुर्वेदिक उपाय:
- गिलोय और तुलसी का काढ़ा: प्रतिदिन सुबह खाली पेट गिलोय स्वरस या तुलसी-काली मिर्च का हल्का काढ़ा पिएं, जो प्राकृतिक एंटी-वायरल का काम करता है।
- ताजा आंवला और च्यवनप्राश: विटामिन-सी से भरपूर आंवले का सेवन श्वसन तंत्र को मजबूत करता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।
- गुनगुना पानी और हल्दी वाला दूध: रात को सोने से पहले चुटकी भर शुद्ध हल्दी और सोंठ मिला गुनगुना दूध संक्रमण से बचाता है।
- नस्य और तेल मालिश (अभ्यंग): नाक में दो बूंद तिल का तेल या अणु तेल डालने से धूल-कण और एलर्जी का प्रवेश रुकता है।
दिनचर्या और आहार में करें यह छोटा बदलाव
आयुर्वेदाचार्यों का कहना है कि मौसमी बीमारियों से बचने के लिए बासी, अत्यधिक तला-भुना और फ्रिज का ठंडा पानी पीने से बचना चाहिए। इसके स्थान पर मौसमी फल, हरी सब्जियां, सुपाच्य खिचड़ी, मूंग दाल और पर्याप्त नींद को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। सुबह 20 मिनट का प्राणायाम (कपालभाति, अनुलोम-विलोम) फेफड़ों में ऑक्सीजन के स्तर को उत्तम बनाए रखता है।
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