पटना। बिहार के कृषि क्षेत्र में ऊर्जा के पारंपरिक और महंगे स्रोतों पर निर्भरता समाप्त करते हुए हरित और सस्ती ऊर्जा का नया युग शुरू हो चुका है। केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम योजना (PM-KUSUM) और राज्य सरकार की मुख्यमंत्री कृषि विद्युत संबंध योजना के सफल क्रियान्वयन से राज्य भर में अब तक 50,000 से अधिक सोलर कृषि पंप सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। इस योजना ने बिहार के छोटे और सीमांत किसानों को डीजल पंपसेट के महंगे खर्च और बिजली की अनियमितता से स्थाई मुक्ति दिला दी है।
📌 योजना के प्रमुख लाभ व आंकड़े:
- भारी सब्सिडी: किसानों को सोलर पंप स्थापना पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा 75% तक का वित्तीय अनुदान।
- सिंचाई खर्च में भारी कटौती: डीजल पर होने वाला प्रति एकड़ ₹4,000 से ₹5,000 का खर्च घटकर शून्य हुआ।
- 24x7 स्वच्छ ऊर्जा: दिन के समय तेज धूप में निर्बाध और उच्च दबाव वाली पानी की आपूर्ति।
- कार्बन उत्सर्जन में कमी: सालाना 1.2 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की बचत।
डीजल पंपों की विदाई, किसानों के चेहरे पर खिली मुस्कान
नालंदा, रोहतास, बक्सर, बेगूसराय और औरंगाबाद के किसानों का कहना है कि पहले डीजल ₹90 प्रति लीटर खरीदकर सिंचाई करने में फसल की लागत बहुत बढ़ जाती थी और मुनाफा नाममात्र का रह जाता था। अब सोलर प्लेट्स लग जाने से बटन दबाते ही खेत में पानी बहने लगता है। न बिजली कटने का डर और न ही हर महीने भारी बिजली बिल भरने की चिंता।
"सोलर पंप लगाने के बाद मेरी खेती की लागत आधी हो गई है। बचे हुए पैसों से मैंने अपने खेत में ड्रिप इरीगेशन और जैविक खाद का उपयोग शुरू किया है। इस वर्ष सब्जियों की फसल से दोगुना मुनाफा हुआ है।" — रामेश्वर सिंह, प्रगतिशील किसान, बिहटा
ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आगामी चरण में किसानों को "ग्रिड-कनेक्टेड सोलर पंप" दिए जाएंगे, जिससे वे अपनी सिंचाई की आवश्यकता पूरी करने के बाद बची हुई अतिरिक्त सौर ऊर्जा को सरकारी बिजली ग्रिड को बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर सकेंगे।
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