नई दिल्ली। नए संसद भवन के भव्य प्रांगण में आहूत संसद के विशेष सत्र के दौरान राष्ट्रीय महत्व के युगांतकारी विधेयकों पर पक्ष और विपक्ष के बीच गहन और ऐतिहासिक विचार-विमर्श हुआ। इस सत्र की सबसे बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण विधेयक) को दोनों सदनों में लगभग सर्वसम्मति से पारित किया जाना रहा। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का संवैधानिक प्रावधान सुनिश्चित किया गया है। सदन में उपस्थित विभिन्न दलों के सांसदों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस कानून का मेजें थपथपाकर स्वागत किया।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम: भारतीय लोकतंत्र का युगांतकारी मोड़
विधेयक पर चर्चा का उत्तर देते हुए कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में नारी सदैव पूजनीय रही है, परंतु नीति-निर्माण और कानून बनाने वाली सर्वोच्च संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अब तक 15% से भी कम था। इस कानून के लागू होने के बाद लोकसभा की 543 सीटों में से 181 सीटें सीधे महिला सांसदों के लिए आरक्षित हो जाएंगी। इससे पंचायती राज संस्थाओं की तरह देश के शीर्ष विधायी मंचों पर भी महिला सशक्तिकरण का नया सूर्योदय होगा।
- परिसीमन और जनगणना के बाद क्रियान्वयन: कानून के प्रावधानों के अनुसार, आगामी जनगणना और उसके बाद गठित होने वाले परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) की सिफारिशों के आधार पर सीटों का रोटेशनल आरक्षण लागू होगा।
- एससी-एसटी महिलाओं के लिए उप-आरक्षण: आरक्षित 33% सीटों के भीतर ही अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की महिलाओं के लिए आनुपातिक आरक्षण का प्रावधान रखा गया है।
- 15 वर्षों की प्रारंभिक अवधि: यह आरक्षण प्रारंभ में 15 वर्षों के लिए लागू होगा, जिसे संसद अपनी समीक्षा के बाद आगे बढ़ा सकेगी।
डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन और टेलीकॉम सुधार बिल
विशेष सत्र में महिला आरक्षण के अतिरिक्त डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने वाले पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन बिल और 138 वर्ष पुराने टेलीग्राफ एक्ट की जगह लेने वाले नए ‘दूरसंचार विधेयक’ पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने साइबर अपराधों, डीपफेक वीडियो और फर्जी कॉल्स पर लगाम लगाने के लिए टेलीकॉम ऑपरेटरों को कड़े नियम और सिम कार्ड जारी करने के सख्त बायोमेट्रिक नियम लागू करने के निर्देश दिए हैं।
"आज का दिन भारत के संसदीय लोकतंत्र के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज होगा। हमारी माताओं, बहनों और बेटियों का नेतृत्व ही विकसित भारत 2047 के संकल्प को सिद्ध करेगा।" - प्रधानमंत्री का संसद में उद्बोधन
विपक्ष की रचनात्मक भागीदारी
विपक्ष के नेताओं ने महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हुए मांग रखी कि इस कानून में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की महिलाओं के लिए भी कोटा तय किया जाए और इसे बिना परिसीमन की देरी के तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। सत्ता पक्ष ने आश्वस्त किया कि संवैधानिक प्रक्रियाओं को पूर्ण पारदर्शिता और गति के साथ पूरा किया जा रहा है।
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