मुजफ्फरपुर। गरीबी, लाचारी और अशिक्षा जब मासूम कंधों पर परिवार के भरण-पोषण का भारी बोझ डाल देती है, तो नन्हे हाथों से स्कूल का बस्ता छूट जाता है और वे औजार थामने पर मजबूर हो जाते हैं। मुजफ्फरपुर जिले के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों, ईंट-भट्ठों और राष्ट्रीय राजमार्ग के ढाबों पर श्रम विभाग, जिला प्रशासन और बचपन बचाओ आंदोलन की संयुक्त टीम ने बड़ा अभियान चलाकर 45 मासूम बच्चों को बाल श्रम के चंगुल से मुक्त कराया है।
📌 अभियान के मुख्य बिंदु:
- बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन: 12 टीमों ने एक साथ 18 प्रतिष्ठानों और 6 ईंट-भट्ठों पर मारा छापा।
- 45 बच्चे सुरक्षित मुक्त: इनमें 12 से 15 वर्ष के 32 लड़के और 13 लड़कियां शामिल।
- दोषी नियोक्ताओं पर सख्त कार्रवाई: 14 प्रतिष्ठान संचालकों के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में प्राथमिकी दर्ज।
- पुनर्वास पैकेज: प्रत्येक बच्चे को तत्काल ₹3,000 की अंतरिम सहायता, मुख्यमंत्री बाल राहत कोष से ₹25,000 की सावधि जमा।
14 घंटे हाड़-तोड़ मेहनत और नाममात्र की मजदूरी
रेस्क्यू किए गए बच्चों की आपबीती रोंगटे खड़े कर देने वाली है। सीतामढ़ी और शिवहर के सुदूर गांवों से लाए गए इन बच्चों से सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक लगातार काम कराया जाता था। ईंट-भट्ठों पर भारी ईंटें ढोने, कोयले की राख हटाने और ढाबों पर गर्म चूल्हों के पास बर्तन मांजने का काम इनसे करवाया जा रहा था। बदले में इन्हें मात्र दो वक्त का रूखा-सूखा खाना और ₹50 से ₹100 की दिहाड़ी दी जाती थी, जो अक्सर इनके बिचौलिये ही हड़प लेते थे।
"बाल श्रम मानवता के माथे पर कलंक है। किसी भी प्रतिष्ठान में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे से काम करवाना कानूनी अपराध है। हमने दोषी नियोक्ताओं पर न केवल एफआईआर दर्ज की है बल्कि उनके व्यावसायिक लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।" — डॉ. राजेश कुमार, उप श्रमायुक्त, तिरहुत प्रमंडल
काउंसलिंग, स्वास्थ्य परीक्षण और आवासीय विद्यालयों में दाखिला
मुक्त कराए गए सभी 45 बच्चों को तत्काल जिला बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। सदर अस्पताल में सभी का विस्तृत मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें कई बच्चे कुपोषण और त्वचा संक्रमण से ग्रसित पाए गए। प्रशासन ने इन बच्चों को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों में निशुल्क दाखिला दिलाने की प्रक्रिया पूर्ण कर ली है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए यह विशेष चेकिंग अभियान पूरे माह अनवरत जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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