गया। भगवान बुद्ध की पावन ज्ञानभूमि बोधगया में तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव का भव्य और आध्यात्मिक शुभारंभ हो गया है। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर परिसर में आयोजित इस वैश्विक समागम में जापान, थाईलैंड, श्रीलंका, म्यांमार, भूटान, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और अमेरिका सहित 30 से अधिक देशों के लगभग 5,000 बौद्ध लामा, भिक्षु और शोधार्थी भाग ले रहे हैं। महोत्सव का मुख्य उद्देश्य वर्तमान वैश्विक तनाव और युद्ध के दौर में भगवान बुद्ध के "अहिंसा परमो धर्म:" और करुणा के संदेश को पूरी दुनिया में प्रसारित करना है।
📌 महोत्सव की खास बातें:
- विशाल शांति पदयात्रा: कालचक्र मैदान से महाबोधि मंदिर तक 30 देशों के भिक्षुओं ने निकाली पारंपरिक शोभायात्रा।
- पवित्र बोधिवृक्ष की छांव में ध्यान: विश्व शांति, सौहार्द और पर्यावरण संरक्षण के लिए 24 घंटे का अखंड महापरित्राण पाठ।
- अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सांस्कृतिक प्रदर्शनी: बौद्ध कला, थांगका पेंटिंग्स और प्राचीन पांडुलिपियों की दुर्लभ प्रदर्शनी।
- पर्यटन को बढ़ावा: विदेशी पर्यटकों के आगमन से गया और नालंदा के हस्तशिल्प और होटल उद्योग में भारी उछाल।
महाबोधि मंदिर को सजाया गया लाखों फूलों से
समारोह के अवसर पर महाबोधि मंदिर के गर्भगृह और मुख्य स्तूप को थाईलैंड और श्रीलंका से मंगाए गए विशेष आर्किड और गेंदे के फूलों से अलौकिक रूप से सजाया गया है। रात्रि में हजारों दीपों की जगमगाहट और पवित्र मंत्रोच्चार से संपूर्ण परिसर दिव्य आभा से आलोकित हो उठा। बौद्ध विद्वानों ने संगोष्ठी में कहा कि भगवान बुद्ध की अष्टांगिक मार्ग की शिक्षाएं आज 21वीं सदी में जलवायु परिवर्तन, मानसिक अवसाद और वैश्विक युद्धों से जूझती मानवता के लिए सबसे प्रासंगिक समाधान हैं।
"बोधगया केवल बिहार या भारत की धरोहर नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व की आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है। यहां से निकलने वाला शांति और करुणा का स्वर ही धरती को विनाश से बचा सकता है।" — भंते ज्ञानानंद, मुख्य समन्वयक, अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महासंघ
जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने विदेशी प्रतिनिधियों और लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बहुभाषी गाइड डेस्क, विशेष सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल कैंप और निशुल्क ई-रिक्शा सेवा की व्यवस्था की है। महोत्सव के अंतिम दिन वैश्विक बौद्ध सर्किट के विकास और पर्यटन आदान-प्रदान पर विशेष समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
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