नई दिल्ली / मुंबई। वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती के संकेतों और मध्य पूर्व के तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में जोरदार हलचल देखने को मिल रही है। घरेलू सर्राफा बाजारों में 24 कैरेट शुद्ध सोने का भाव मजबूती के साथ 75,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के पार बना हुआ है, जबकि औद्योगिक मांग और सोलर पैनल विनिर्माण में भारी खपत के चलते चांदी भी 92,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही है।
शादी-ब्याह के सीज़न में खुदरा मांग पर क्या होगा असर?
देश भर के प्रमुख ज्वेलर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) के अनुसार, आगामी शादियों के लग्न सीज़न के कारण कीमतों में तेजी के बावजूद ग्राहकों की खरीदारी जारी है। भारतीय परिवारों में सोने को केवल आभूषण नहीं बल्कि संकट के समय सबसे सुरक्षित वित्तीय ढाल माना जाता है। हालांकि, ऊंचे दामों को देखते हुए अब उपभोक्ता भारी पारंपरिक आभूषणों की जगह हल्के वजन वाले 18 कैरेट व 22 कैरेट के हॉलमार्क डिज़ाइनर गहनों और डिजिटल गोल्ड को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कीमतों में तेजी के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व घरेलू कारण:
- केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना और यूरोपीय देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोने के भंडार में रिकॉर्ड टन की बढ़ोतरी की है।
- रुपये की विनिमय दर: डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और आयात शुल्क में किए गए हालिया नीतिगत संशोधनों का असर भी स्थानीय बाजार भाव पर पड़ा है।
- चांदी की औद्योगिक क्रांति: इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), 5G इंफ्रास्ट्रक्चर और सोलर फोटोवोल्टिक पैनल्स में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है, जिससे इसकी वैश्विक आपूर्ति में कमी और कीमतों में मजबूती बनी हुई है।
निवेशकों और आम उपभोक्ताओं के लिए विशेषज्ञों की सलाह
"सोने में एकमुश्त बड़ी रकम निवेश करने के बजाय सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB), गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए थोड़ा-थोड़ा निवेश करना सबसे समझदारी भरा निर्णय है। भौतिक सोना खरीदते समय 6 अंकों वाले HUID हॉलमार्क की जांच अवश्य करें।" - कमोडिटी एनालिस्ट, एंजेल वन
विशेषज्ञों का अनुमान है कि जब तक वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह शांत नहीं हो जाता, तब तक कीमती धातुओं में गिरावट की संभावना सीमित है और सोने में मध्यम से लंबी अवधि का रुझान सकारात्मक बना रहेगा।
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