नई दिल्ली। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत घरेलू मांग, उत्पादन गतिविधियों में निरंतर विस्तार और बेहतर कर अनुपालन के दम पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह ने इतिहास रच दिया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के ताजा महीने में कुल सकल जीएसटी राजस्व 1.85 लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े को पार कर गया है। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 12.4% की शानदार वार्षिक वृद्धि दर्शाता है। यह लगातार 14वां महीना है जब देश का मासिक जीएसटी कलेक्शन 1.60 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है।
आर्थिक वृद्धि और टैक्स सिस्टम में सुधार का नतीजा
वित्त विशेषज्ञों के अनुसार, यह रिकॉर्ड तोड़ राजस्व संग्रह देश की बुनियादी आर्थिक मजबूती को प्रमाणित करता है। ऑटोमोबाइल बिक्री, सीमेंट उत्पादन, रियल एस्टेट बूम, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (Consumer Durables) की मांग और त्योहारी खरीदारी में आई रिकॉर्ड तेजी ने राजस्व को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। साथ ही, जीएसटी नेटवर्क (GSTN) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से फर्जी बिलिंग और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की धोखाधड़ी पर नकेल कसी गई है, जिससे वास्तविक करदाताओं की संख्या में अभूतपूर्व इजाफा हुआ है।
राजस्व का मदवार वर्गीकरण (Revenue Breakdown):
- सीजीएसटी (CGST - केंद्रीय जीएसटी): लगभग 34,250 करोड़ रुपये
- एसजीएसटी (SGST - राज्य जीएसटी): लगभग 42,180 करोड़ रुपये
- आईजीएसटी (IGST - एकीकृत जीएसटी): 94,800 करोड़ रुपये (जिसमें आयातित वस्तुओं पर वसूले गए 46,200 करोड़ रुपये शामिल हैं)
- उपकर (GST Cess): 13,850 करोड़ रुपये
राज्यों के विकास बजट को मिलेगा बड़ा संबल
जीएसटी संग्रह में आए इस उछाल का सीधा लाभ राज्यों को मिलेगा। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे विकासशील राज्यों को केंद्रीय करों के हस्तांतरण (Devolution of Taxes) और आईजीएसटी सेटलमेंट के जरिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन प्राप्त होंगे। इससे राज्यों में सड़कों, ग्रामीण जलापूर्ति, स्वास्थ्य केंद्रों और शिक्षा के बुनियादी ढांचे के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी।
"1.85 लाख करोड़ का जीएसटी संग्रह यह सिद्ध करता है कि 140 करोड़ भारतीयों के परिश्रम और सरकार की पारदर्शी नीतियों के चलते भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।" - केंद्रीय वित्त मंत्रालय
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